गुरुवार, 2 फ़रवरी 2023

पैरों में होने वाले दर्द (foot pain )का आसान उपचार

 पैरों में होने वाले दर्द (foot pain )का  आसान उपचार
आज के समय में पैरों में दर्द होना एक आम समस्या बन गई है। आपके एक पैर या दोनों पैरों में हल्का दर्द या तेज दर्द हो सकता है। पैरों में दर्द होने पर आप खुद को असहज महसूस करते है और किसी भी काम में आपका मन भी नहीं लगता है।
पैरों में दर्द होने का कारण शरीर में कमजोरी, पोषक तत्वों की कमी, डिहाइड्रेशन और लम्बे समय तक खड़े रहने या लम्बे समय तक बैठे रहने की वजह से पैरों में दर्द होने लगता है। ऐसे में पैरों की मांसपेशियों में ऐंठन और थकान की वजह से पैरों में दर्द, पैर सुन्न हो जाना या उनमें झुनझुनी सी महसूस होने लगती है। आइये हम आपको पैरों के इस दर्द से छुटकारा पाने के लिए कुछ उपाय बताते हैं।

बर्फ से सिंकाई से पैरों में होने वाले दर्द (foot pain )का इलाज़

दिन भर काफी भागदौड़ और शारीरिक मेहनत के बाद पैरों में होने वाले दर्द से निजात पाने के लिए आप पैरों की बर्फ से सिंकाई कर सकते हैं। इससे आपको दर्द में आराम मिलेगा और मांसपेशियों की सूजन भी कम होगी।
बर्फ की सिंकाई करने का तरीका: कुछ बर्फ के टुकड़ों को एक पतले तौलिए में लपेटें और इससे पैरों में दर्द वाली जगह की 10 से 15 मिनट तक सिंकाई करें। लेकिन यह ध्यान रखें कि सीधे तौर पर बर्फ का इस्तेमाल त्वचा पर ना करें।

मसाज से पैरों में होने वाले दर्द (foot pain ) का इलाज़

मांसपेशियों को होने वाले नुकसान की वजह से होने वाले पैरों के दर्द से छुटकारा पाने के लिए मसाज एक बेहतर उपाय है। थेरेपी से पैरों की सूजन और ज्यादा एक्सरसाइज की वजह से मसल्स को होने वाले नुकसान से छुटकारा पाया जा सकता है। मसाज से खून का बहाव तेज हो जाता है जिससे मसल्स में होने वाले तनाव में आराम हो जाता है।
मसाज करने का तरीका: ऑलिव, नारियल या सरसों के तेल को हल्का गर्म करें और प्रभावित जगह पर 10 मिनट तक मसाज करें। ऐसा दिन में 2 से 3 बार करने से पैर दर्द में आराम मिल जाता है।

मंगलवार, 7 नवंबर 2017

मात्र 2 मिनट में कब्‍ज से छुटकारा (rid-of-constipation) दिलाएगा घर में बना ये चूर्ण

अनियमित खानपान और बेकार जीवनशैली की वजह से हर कोई कब्‍ज, अपच और पेट में गैस की समस्‍या से पीडि़त है। पेट की इन समस्‍याओं की वजह से लोगों में चिड़चिड़ापन, तनाव और आलस जैसी बीमारियां घेरने लगती है। इसके लिए लोग मार्केट में मिलने वाले तमाम तरह के चूर्ण और पाउडर का सेवन करते हैं लेकिन सही परिणाम नहीं मिल पाता है। जबकि इसके लिए सबसे पहले आपको अपनी जीवनशैली को सुधारना चाहिए।
रोजाना एक्‍सरसाइज, पर्याप्‍त मात्रा में पानी पीना, रेसेदार भोजन, फल और हरी सब्जियों का सेवन जरूर करना चाहिए।इन कार्यों को नियमित रूप से करने पर आपकी यह समस्‍या काफी हद तक सही हो सकती है। इसके बाद भी अगर आपको इस समस्‍या से छुटकारा नहीं मिलता है तो हम आपको ऐसे चूर्ण के बारे में बता रहे हैं, जिसके सेवन से आप कब्‍ज, एसिडिटी, पेट के मरोड़ और गैस से जड़ से छुटकारा पा सकते हैं। तो चलिए हम आपको बता रहे हैं उस चुर्ण के बारे में, जिसे आप आपने घर में बड़ी ही आसानी से बना सकते हैं। इस चूर्ण को बनाना बहुत आसान है।

सामग्री:- 

जीरा,अजवाइन और काला नमक

कैसे बनाए

सबसे पहले जीरे को धीमी आचं पर भून लें। भूनने के बाद इसे बारीक पीस लें। इसी तरह अजवाइन को भी भूनें और पीस ले। इसके बाद काला नमक ले लें और इन तीनों चीजों को मिला लें। ध्‍यान ये रखना है कि इन तीनों की मात्रा समान होनी चाहिए। इसको अच्‍छी तरह से मिक्‍स करने के बाद किसी डिब्‍बे में रख लें।

कैसे खाएं

चूर्ण को आप रोजाना आधा चम्‍मच गुनगुने पानी में मिलाकर पी सकते हैं। इसे आप सुबह और शाम को खाना खाने के आधा घंटे बाद ले सकते हैं। यह लिक्विड पुरानी से पुरानी कब्‍ज को जड़ से खत्‍म कर देगी।

बुधवार, 3 मई 2017

पथरी(pathri) का औयुर्वेदिक इलाज़ जो जड़ से खत्म कर देगा

आजकल के समय में हम जो चीज का सेवन कर रहे है । उस सब में कोई न कोई मिलावट जरूर है ।जहाँ तक की खेतो में उगने वाली सब्जियों भी आज कैमिकल से तैयार की जा रही है जिस कारण इंसान बीमारियों की और घिरता जा रहा है। इसमें से पथरी की समस्या आम हो गयी हैं । आप हैरान होंगें कि इस बीमारी का इलाज भी हमारे घर आंगन में ही हैं । मगर हमारी मानसिकता हो गयी है डॉक्टर के पास भागने की ।
pathri ka ilaaz



आओ जानें एक ऐसा उपाय जिसके बाद इस बिमारी में डॉक्टर के पास शायद ही जाना पड़े ।
पत्थरचट्टा नामक पौधा जो हमारे घर के आंगन में नहीं तो पड़ोस के किस आंगन में अवश्य मिल जायेगा । इसे पाखाण भेद भी कहते हैं जिसका अर्थ हैं पथर को तोड़ने वाला । यह पौधा ही पथरी के लिए रामबाण औषधी है । पत्थरचट्टा के 3 पत्तों को सुबह व् शाम को खाली पेट 20 से 25 दिन सेवन करने से पथरी टूट कर निकल



अत: आयुर्वेद अपनाये स्वास्थ्य बचाए । मूत्र संबंधी जितने भी रोग होते हैं उसमें भी पत्थरचट्टा बेहद लाभदायक दवा है । शयन रखें इस औषधि का सेवन करते समय चूना, बिना साफ किये हुए फल और अधिक चावल आदि का सेवन न करें । बता दें कि पथरी की मुख्य वजह कैलशियम होती है । शरीर में अधिक कैलशियम का होना पथरी का कारण बनता है ।

किसी भी होमियोपैथी की दुकान पर Berberis Vulgaris नामक दवा पूछें । साथ में याद रखें – Mother Tincture उसकी पोटेंसी है ।
पोटेंसी मात्र से दुकान वाला समझ जायेगा । बता दें कि Berberis Vulgaris दवा भी पत्थरचट्टा से ही बनी है । तरल रूप में पत्थरचट्टा का botanical name Berberis Vulgaris है ।



इस दवा की 10 बूंदों को एक चौथाई (1/4) कप गुण गुने पानी में मिलाकर दिन मे चार बार (सुबह, दोपहर, शाम और रात) लेना है । चार बार अधिक से अधिक और कम से कम तीन बार । इसे लगातार एक से डेढ़ महीने तक लें, कभी कभी दो महीने भी लग सकते हैं । जीतनी भी पथरी, कहीं भी हो गॉल ब्लेडर (Gall bladder) मे हो या फिर किडनी मे हो, या युनिद्रा के आसपास हो, या फिर मुत्रपिंड मे हो । वो सभी स्टोन को पिगलाकर ये निकाल देता हे ।



दो महीने बाद सोनोग्राफी करवा सकते हैं, उससे आपको पता चल जायेगा कितना टूट गया है, कितना रह गया है । अगर रह गया है तो थोड़े दिन और ले लीजिए । इस दवा का साइड इफेक्ट नहीं है । ये तो हुआ जब पथरी टूट के निकल गई । अब दोबारा भविष्य मे पथरी ना बने उसके लिए क्या ??? क्योंकि कई लोगो को बार बार पथरी होती है ।

एक बार पथरी टूट के निकल जाए अब कभी दोबारा नहीं आना चाहिए इसके लिए क्या ???
इसके लिए एक और होमियोपैथी मे दवा है CHINA 1000 । प्रवाही स्वरुप की इस दवा के एक ही दिन सुबह-दोपहर-शाम मे दो-दो बूंद सीधे जीभ पर डाल लें । सिर्फ एक ही दिन में ही इस दवाई को तीन बार ले लेने से फिर भविष्य मे कभी भी स्टोन नहीं बनेगा ।

शनिवार, 29 अप्रैल 2017

आयुर्वेद से शरीर के अतिरिक्‍त बालों को करें नियंत्रित कैसे करे (unwanted hair)

आयुर्वेद से शरीर के अतिरिक्‍त बालों को करें नियंत्रित कैसे करे (unwanted hair)
आयुर्वेद से शरीर के अतिरिक्‍त बालों को करें नियंत्रित

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अतिरिक्‍त बालों को नियंत्रित करने के उपाय
शरीर में कई कारणों से बाल बढ़ सकते हैं। लेकिन हममें से ज्यादातर सैलून जाकर शरीर के इन अतिरिक्त बालों से निजात पा लेते हैं। यही नहीं इसके लिए काफी कुछ सहना भी पड़ता है। दर्द से भरे वैक्स और जेब पर भारी खर्च। लेकिन क्या आपको पता है कि शरीर के अतिरिक्त बालों से निजात पाने के लिए आर्युवेदिक उपचार भी है? जी, हां! आयुर्वेदिक उपचार के जरिये आप शरीर के अतिरिक्त बालों से न सिर्फ निजात पा सकते हैं बल्कि दमकती त्वचा भी हासिल कर सकते हैं। आइये इन उपचारों पर गौर करें।

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हल्दी और काले चने का पाउडर
हल्दी को प्राकृतिक हेयर रिमूवर कहा जाए तो गलत नहीं होगा। यदि इसे काले चने के साथ मिला दिया जाए तो यह ज्यादा असरकारक हो जाता है। इसके लिए आपको हल्दी और काले चने के पाउडर का पेस्ट बनाना है। इसके लिए गुलाब जल का इस्तेमाल करें। इस पेस्ट को शरीर के हर उस अंग में लगाएं जहां के आप बाल निकालना चाहते हैं। इस पेस्ट को 30 मिनट तक रखें। इसके बाद धोने के लिए गर्म पानी का इस्तेमाल करें। ऐसा प्रत्येक तीन माह तक करना चाहिए। जिनकी त्वचा रूखी है, वे इस पेस्ट में दही भी मिला सकती हैं।

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ठनका पाउडर
ठनका पाउडर ठनका पेड़ से बनाया जाता है। यह पेड़ म्यांमार में पाया जाता है। इसे भी आयुर्वेदिक प्राकृतिक हेयर रिमूवर के रूप में जाना जाता है। इसके अलवा ठनका पाउडर का इस्तेमाल त्वचा को गोरा बनाने के लिए भी किया जाता है। यही नहीं इसके इस्तेमाल से दमकती त्वचा भी हासिल की जा सकती है। साथ ही त्वचा मुलायम भी बनती है और शरीर से निकलने वाले अतिरिक्त तेल की मात्रा में भी कमी आती है। ठनका पाउडर का इस्तेमाल करने हेतु इसका गुलाब जल से पेस्ट बनाएं। सूखने तक जरूरी शरीर के अंगों में लगाकर रखें। इसके बाद हल्के गुनगुन पानी से धो लें।


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कुसुम तेल
यह काफी हद तक सूरजमुखी जैसा होता है। इसमें असंख्य पौष्टिक तत्व पाए जाते हैं। इसका इस्तेमाल खाना बनाने में भी किया जा सकता है। इसके अलावा सलाद पर भी इसे छिड़का जा सकता है। यही नहीं हर्बल कास्मेटिक प्रक्रिया में भी इसका इस्तेमाल किया जाता है। कुसुम तेल की एक विशेष खासियत यह है कि स्थायी परिणाम के लिए इसका इस्तेमाल उपयुक्त होता है। कुसुम तेल का उपयोग वैसे ही किया जाता है जैसे शेविंग या वैक्सिंग आदि क्रीमों को होता है। इसका इस्तेमाल रात को करें। मतलब यह कि रात को लगाकर रखें। अधिकतम 3 से 4 घंटे बाद अंग को गुनगुने पानी से धो दें।

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हर्बल घी
सामान्यतः इस घी को चिकित्सा के लिए इस्तेमाल किया जाता है। जिनमें हारमोन सम्बंधी समस्याएं होती हैं, वे इसका इस्तेमाल कर सकते हैं। इसके अलावा स्त्रीरोग में भी इसका उपयोग उपयुक्त माना जाता है। इसे आप आयुर्वेदिक स्टोर से आसानी से खरीद सकते हैं। आयुर्वेदिक विशेषज्ञों के मुताबिक हर्बल घी सुबह एक बार और शाम को एक बर लेना चाहिए।


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हल्दी और चंदन
जैसा कि पहले ही जिक्र किया जा चुका है कि हल्दी एक प्राकृतिक हेयर रिमूवर है। इसी तरह चंदन को आयुर्वेद में औषधि समान माना गया है। चंदन को त्वचा के लिए बेहतरीन उत्पाद माना जाता है। हल्दी के साथ यदि चंदन को मिला दिया जाए तो न सिर्फ शरीर से अतिरिक्त बालों से निजात मिलता है बल्कि त्वचा दमकती हुई बन जाती है। इसे भी पेस्ट के रूप में इस्तेमाल किया जाता है। इसके लिए आप गुलाब जल की जगह दूध का उपयोग कर सकते हैं। इस पेस्ट को शरीर में कुछ घंटों के लिए रखें। अंततः गुनगुने पानी में धो दें। इसे प्रत्येक माह आजमाएं।

थायरायड (Thyroid Disorder) की बीमारी का आयुर्वेदीय इलाज

थायरायड (Thyroid Disorder) की बीमारी का आयुर्वेदीय इलाज
हयपोथायरॉइडिज़म (Hypothyroidism) की बीमारी ज़्यादातर  स्त्रीयों में पाई जाती है जिससे कि उनका आंतरिक चयपचय (metabolism) औसत से काफ़ी कम हो जाता है. आयुर्वेदीय चिकित्सा द्वारा इस रोग का निवारण भली-भाँति प्रकार किया जा सकता है.

थायरॉइड(Thyroid Disorder) क्या है


चयपचय की क्रिया को नियंत्रित करना थायराइड ग्रंथि का कार्य होता है और इसके द्वारा ही हम शरीर में लिया गया भोजन, जल और प्राण वायु कोशिकायों में सही रूप से चयपचय होकर उर्जा का स्रोत बनता है.
छोटी अवशेषों में बाँटने के उपरांत उनका पुनर्संगठित होकर नवनिर्माण करना भी इस ग्रंथि के द्वारा स्रावित हॉर्मोन से संतुलित किया जाता है. जिस प्रक्रिया द्वारा  शरीर में सुगठित तत्वों का निर्माण होता है उसे एनाबोलीज़म या चय कहा जाता है जबकि विघटन करने वाली प्रक्रिया को कॅटबॉलिज़म या पचय कहा जाता है. इन दोनो प्रक्रियायों के मिलन से उत्पन्न कार्य को मेटाबोलीज़म (metabolism) या चयपचय कहा जाता है.

जब व्यक्ति पूर्णतयः विश्राम की स्थिति में होता है तब आधारिक चयपचायी मान (Basal Metabolic Rate)- BMR की दर को लेना संभव है. यह व्यक्ति की स्वास्थ का माप है और यह प्राणवायु में प्रयोग हुई ऑक्सिजन एवं निकली हुई कार्बन–डाई ऑक्साइड के दर को निर्धारित करता है. अन्तःस्राविय ग्रंथियों के अच्छी तरह से चलने पर रक्त या लिंफ में रसायनिक परिवर्तन होते हैं जिसमें मुख्य अंतः स्राविय ग्रंथियों का विशेष कार्य समन्वित है.

थायरॉइड नामक ग्रंथि का कार्य इनमें सबसे महत्वपूर्ण है. यह गले के अग्र भाग में मौजूद होता है और इससे थायरॉक्सीन(thyroxine) नामक महत्वपूर्ण हॉर्मोन का स्राव होता है. जब यह ग्रंथि ठीक से कार्य न करती हो, जैसे कि मयक्सेडीमा(myxedema) में या फिर क्रीटीनिज़म(cretinism) नामक अवस्था में. जब इस ग्रंथि से थिरॉक्साइन हॉर्मोन अधिकता में बनने लगे उसे एक्शोफ्ताल्मीक गायटर (Exophthalmic goitre) या  ग्रेव के रोग के नाम से जान जाता है.

विभिन्न प्रकार के थायरॉइड रोग Various Types Of Diseases Of Thyroid In Hindi


हाइपरथायरॉइदिस्म(Hyperthyroidism): इस अवस्था में व्यक्ति के शरीर में थिरॉक्साइन की स्राव आवश्यकता से बहुत अधिक होता है. यह 30 से 40 वर्ष की उमर के व्यक्तियों में अधिक पाया जाता है. पीड़ित व्यक्ति के शरीर में कंपन, चिड़चिड़ापन, घबराहट और इस प्रकार के लक्षण देखने को मिलते हैं. बार-बार होने वाले दस्त , गर्मी का अधिक लगना, मासिक धर्म में अनियमितता और कभी-कभार आँखों की पुतलियों का बाहर को निकलना. ऐसे लोग प्रायः जब बाहर निकलते हैं तो खुद को अजीबोगरीब स्थिति में पाते हैं जहाँ पर वे बात करना चाहते हैं पर स्वयं को शक्तिहीन महसूस करते हैं. वे ज़्यादातर चिड़े हुए रहते हैं और छोटी सी बात आर अत्यधिक क्रुद्ध हो जाते हैं.



हाइपोथायरिडिसम (Hyperthyroidism): इस स्थिति में में थायरॉक्साइन का स्राव सामान्य से कम पाया जाता है. ज़्यादातर रोगी उस कगार पर पाए जाते हैं जिसमें जाँच द्वारा पता किया जान मुश्किल होता है. परंतु इनके कारण रोगी के शरीर में प्रायः अप्रत्याशित रूप से थकावट, कमज़ोरी और मुख्य कार्यों में अवरोध पाया जाता है.


लंबी अवधि में मयक्षेदेमा नमक बीमारी का जन्म होता है जिससे आँखों में सूजन, त्वचा और पिंदलियों और शरीर के काई अंगों में सूजन पाई जाती है. त्वचा का सूखापन, पीलापन, भवों के बालों का टूटना, शरीर के तापमान का कम रहना, हृदय की धड़कन का कम होना, भूख का कम लगना, कब्ज़ीयत और रक्ताल्पता (अनेमिया).



थायरायड के रोगों में उपचार विधि (Line of Treatment In Thyroid Diseases As Per Ayurveda In Hindi)


महर्षि चरक के अनुसार थायरॉइड का रोग अधिक मात्रा में दूध पीने वालों को नही होता. इसके अलावा साबुत मूँग, पुराने चावल, जौ, सफेद चने, खीरा, गन्ने का जूस और दुग्ध पदार्थों का सेवन करना भी अत्यंत आवश्यक है. इसके विपरीत खट्टे और भारी पदार्थों का सेवन नही करना चाहिए.


कचनार का प्रयोग इस ग्रंथि के अच्छी प्रकार से सक्रिय रहने के लिए आवश्यक है. इसके अलावा , ब्राहमी, गुग्गूल, शिलाजीत भी लाभदायक है. गोक्शुर और पुनर्नव भी इस रोग में फ़ायदा देते हैं.
आसान घरेलू प्रयोग Simple Ayurvedic Home Remedy For Revitalizing Thyroid In Hindi

11 से 22 ग्राम जलकुंभी का पेस्ट बनाकर थायरॉइड के क्षेत्र में लगाने से इस स्थिति में लाभ मिलता है. यह आयोडीन की कमी को पूरा करता है. यह तो सर्वविदित हैं की नारियल तेल में पाए जाने वाले फैटी एसिडस से बहुत से लाभ मिलते हैं. यह शरीर के अंगों, मस्तिष्क को विशिष्ट लाभ प्रदान करने में सहायक है. और यह हयपोथेरॉडिज़ॅम नामक रोग को ठीक करने में सहायक है.

योग द्वारा थायरॉइड ग्रंथि के रोगों का उपचार (Treatment Of Thyroid Problems With Yogasanas)


सर्वांगसन करने से थायरॉइड ग्रंथि के क्षेत्र में दबाव पड़ता है और इससे थायरॉकसीन के स्राव में सुधार पाया जाता है. इसमें शरीर के स्थाई पड़े हुए अंतः स्रावीय ग्रंथि तंत्र पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है. परंतु अत्यंत गंभीर थायरो-टोक्सीकोसिस(Thyrotoxicosis), शारीरिक कमज़ोरी तथा जहाँ पर थायरॉइड बहुत बढ़ गया हो. उस स्थिति में इन आसनों को नही करना चाहिए. अपितु पहले चिकित्सकीय परामर्श के अनुसार रोग का निवारण करें. परंतु सूर्य नमस्कार, पवन्मुक्तासन जो की मस्तिष्क और गर्दन के क्षेत्र में अधिक प्रभावशाली हों, उनका अभ्यास होना चाहिए. सुप्त्वाज्रासन, योग मुद्रा और पीछे की और झुक के करने वाले आसन अत्यंत लाभदायक हैं.

इस रोग में उज्जयी प्राणायाम लाभदायक है. यह गले के क्षेत्र में प्रभावशाली होता है. यह हायपोथॅलमस और दिमाग़ के निचले क्षेत्र को उर्जावान बनाकर सीधे-सीधे लाभ देता है और चयपचय की क्रिया को भी नियंत्रित करता है. साथ ही नाड़ी शोधन प्राणायाम का भी विशेष लाभ इसमें पाया जाता है.

चमकती त्वचा के लिए 10 आसान आयुर्वेदिक नुस्खे (Top 10 Ayurvedic Tips For Glowing Skin)

चमकती त्वचा के लिए 10 आसान आयुर्वेदिक नुस्खे (Top 10 Ayurvedic Tips For Glowing Skin)
हमें अपनी त्वचा की देखभाल भी प्राकृतिक तरीके (Natual Skin Care) से ही करना चाहिए क्योंकि प्रकृति में ही छिपा है हमारी सुंदरता का राज। बस हमें इसके असर और इस्तेमाल की जानकारी होनी चाहिए। इसमें न तो कोई साइड इफेक्ट का डर है और न ही किसी रिएक्शन का खतरा।
चेहरे और त्वचा का सौन्दर्य, रंगत और कोमलता बढ़ाना चाहते हैं तो हमें प्राकृतिक सौन्दर्य प्रसाधन का इस्तेमाल इसलिए भी करना चाहिए क्योंकि इससे हमारे चेहरे और त्वचा में कुदरती आभा आएगी और यह सुंदरता टिकाऊ भी होगी।
त्वचा को सबसे ज्यादा नुकसान सूर्य की अल्ट्रावायलेट किरणों, धूप, प्रदूषण, तनाव, नींद की कमी, ध्रूमपान और शराब के सेवन से होती है।
बाजार में बिकने वाले महंगे सौंदर्य उत्पाद पर यकीन करने की बजाय अगर हम घरेलू और आयुर्वेदिक नुस्खों  को आजमाएं तो त्वचा में निखार और चमक आने के साथ-साथ त्वचा स्वस्थ भी रहेगी।

ग्लोइंग स्किन 10 आयुर्वेदिक नुस्खे (Ayurvedic Tips for Glowing Skin)

1. हल्दी से हटते हैं मुहांसे
हल्दी एक प्राकृतिक एंटीसेप्टिक एंटी-फंगल है। इसके लेप लगाने से त्वचा पर मुहांसे, पिंपल और पिग्मेंटेशन नहीं होते हैं।
2. चंदन से स्किन में आता ग्लो
बाजार में त्वचा की देखभाल के लिए बिकने बनने वाले ज्यादातर कॉस्मेटिक में चंदन का इस्तेमाल होता है। चंदन से त्वचा में निखार आता है। चंदन त्वचा को ठंडक भी पहुंचाता है। इसके इस्तेमाल से त्वचा पर दाने और मुहांसे नहीं होते हैं।
3. एलोवेरा त्वचा की करती सुरक्षा
एलोवेरा एक नेचुरल एंटी क्लिंजर (Natural Skin Cleanser) है। इससे त्वचा चमकदार बनती है। इसमें पाए जाने वाले एंटी इंफ्लेमटरी गुण से त्वचा की बाहरी परत को सुरक्षा मिलती है। इसके इस्तेमाल से स्किन इंफेक्शन (Skin Infection) होने पर होने वाली जलन भी कम होती है।
4. नीम की पत्ती से त्वचा में आती चमक
त्वचा के लिए नीम की पत्ती काफी कारगर होती है। इससे त्वचा में प्राकृतिक निखार आता है। नीम की पत्ती के पाउडर और पिसी हुई गुलाब की पंखुड़ी को नींबू के रस के साथ मिलाकर लगाने से त्वचा में चमक आती है।
5. एवाकाडो से स्किन को मिलता प्रोटीन
एवाकाडो (Avocado) से त्वचा में प्राकृतिक चमक आती है। यह ड्राय स्किन वालों के लिए काफी कारगर है। एवाकाडो में प्रोटीन होता है, जो त्वचा के लिए काफी फायदेमंद है।
6. नींबू से मिटती हैं झुर्रियां
चेहरे पर नींबू का रस लगाएं। निचोड़े गए नींबू के छिलके भी चेहरे पर कुछ दिन तक मल सकते हैं। इससे चेहरे की झुर्रियां मिटेंगी। मुंह धोते समय गालों को हथेलियों से थपथपाकर सुखाएं, इससे गालों में रक्त का संचार बढ़ता है और झुर्रियां मिट जाती हैं।
7. डार्क स्पॉट मिटाने के लिए टमाटर है कारगर
चेहरों का डार्क स्पॉट (Dark Spots) मिटाने में टमाटर काफी असरदार है। टमाटर के रस में नींबू का रस, हल्दी पाउडर और बेसन मिलाकर लेप बना लें। इस लेप को गालों पर लगाएं। सूखने के बाद पानी से चेहरे को धो लें। रोज एक बार इसे आजमाएं। डार्क स्पॉट खत्म हो जाएँगे।
8. चुकंदर चेहरे को बनाएगी गुलाबी
चुकंदर का सेवन त्वचा में गुलाबी निखार लाता है। चुकंदर में काफी मात्रा में आइरन होता है, जिससे हीमोग्लोबिन मिलता है। इसे पीस कर चेहरे पर भी लगा सकते हैं। रोजाना इसे आजमाने से चेहरे पर गुलाबी निखार आता है।
9. अंकुरित चना और मूंग खाएं
अंकुरित चना और मूंग सुबह-शाम खाएं। इससे चेहरे की झुर्रियां खत्म होंगी। चना और मूंग में विटामिन ई होता है, जो झुर्रियां मिटाने में कारगर होता है। चना और मूंग नियमित खाने से स्किन में ग्लो आता है।
10. गाजर का रस पीएं
गाजर में एंटी ऑक्सीडेंट पाया जाता है, एक ग्लास गाजर का रस रोज पिएं। इससे त्वचा में निखार आता है, झुर्रियां गायब होती हैं।
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मंगलवार, 31 जनवरी 2017

आंवले का जूस

आंवले का जूस
आंवले  का प्रयोग भारतीय घरों में कई रूपों में किया जाता है, लेकिन शायद आप यह नहीं जानते कि रोजाना सुबह एक गिलास आंवला का जूस पीना आपके स्वास्थ्य को कितना फायदा पहुंचा सकता है। डायबिटीज  कंट्रोल करने से लेकर आपकी सेक्स  लाइफ को बेहतर बनाने तकआंवले का जूस आपके लिये बहुत ज़रूरी है।
आइये जानते हैं इससे मिलने वाले फायदों के बारे में :ख़राब कोलेस्ट्रॉल(LDL) को कम करना : अगर आप हाई कोलेस्ट्रॉल से पीड़ित हैं तो सिर्फ एक ग्लास आंवले का जूस आपके लिये बहुत फायदेमंद साबित हो सकता है। जर्नल मेनोपॉज में प्रकाशित एक शोध के अनुसार, आंवले के नियमित सेवन से ख़राब कोलेस्ट्रॉल की मात्रा कम होती है और शरीर में अच्छे कोलेस्ट्रॉल की मात्रा बढ़ जाती है। इसके अलावा ये ट्राईग्लीसेराइड लेवल को कम करके इंसुलिन रेजिस्टेंस को भी बढ़ा देते हैं।
बालों के लिये फायदेमंद : विटामिन सी और एंटी-ऑक्सीडेंट से भरपूर होने के कारण आंवले के जूस का नियमित सेवन आपके बालों के लिये वरदान है। ये बालों को तेजी से बढ़ाने के अलावा उन्हें मजबूत और काला बनाये रखते हैं।
त्वचा के लिये फायदेमंद : आंवले में एंटी-आक्सीडेटिव क्षमताएं होने के कारण यह आपकी त्वचा को हमेशा यंग बनाये रखते हैं और बढती उम्र के प्रभावों को आपसे दूर रखते हैं।
सर्दी-जुकाम से राहत : आंवले में ऐसे कई औषधीय गुण होते हैं जिनसे यह आपको सर्दी जुकाम जैसी आम बीमारियों से लम्बे समय तक बचाये रखते हैं।
डायबिटीज को कंट्रोल करना : जर्नल फ़ूड एंड फंक्शन में 2004 में प्रकाशित एक शोध के अनुसार आंवले में गैलिक एसिड, गैलोटेनिन, एलैजिक एसिड और कोरिलैगिन पाये जाने और उनके एंटी-डायबिटिक क्षमताओं के कारण यह आपके ब्लड ग्लूकोज लेवल को कम करते हैं और आपके डायबिटीज को नियंत्रण में रखते हैं। इसलिए रोजाना जूस पीना न भूलें।
कैंसर से बचाव : आंवले में एंटी-ऑक्सीडेंट, एंटी-इंफ्लेमेटरी और इम्यूनोमॉड्यूलेटरी क्षमताएं होने के कारण इसके जूस का नियमित सेवन हमारे शरीर को कैंसर से बचाने में मदद करता है।
सेक्स लाइफ  बेहतर बनाने में मददगार : आंवले में कामोत्तेजक गुण पाये जाते हैं, साथ ही ये विटामिन सी के भी मुख्य स्रोत होते हैं जिस कारण ये पुरुषों में स्पर्म को बढ़ाने में मदद करते हैं। यह सेक्स के दौरान आपकी क्षमता को भी बढ़ाने में मदद करते हैं जिससे आपकी सेक्स लाइफ और बेहतर हो जाती है। 

गुरुवार, 27 अक्टूबर 2016

किडनी फेल्योर मे किया चमत्कार गौमूत्र और विशेष काढ़े ने.

किडनी फेल्योर मे किया चमत्कार गौमूत्र और विशेष काढ़े ने.



मैने किडनी के विषय में पहले 1 लेख लिखा था जिसके परिणाम स्वरुप मुझे 2-3 लोगो ने कोल करके बताया कि उनकी किडनी ठीक हो गई है. डॉक्टर्स ने बताया था के उनकी किडनी सिकुड़ चुकी है और अभी डायलिसिस के लिए तैयार रहें. तो उन्होंने ये बताया हुआ प्रयोग किया और कुछ ही दिनों में उनकी रिपोर्ट आई के उनकी किडनी सही हो गयी है और अभी उनको डायलिसिस की ज़रूरत नहीं है. वही प्रयोग आज मैं Only Ayurved के साथ शेयर करना चाहता हूँ, जिस से के अनेक लोगों तक ये प्रयोग पहुंचे और अनेक जन इसका लाभ उठा सकें. आइये जाने इस प्रयोग के बारे में.
*प्रयोग इस प्रकार है*
किडनी फेल्यर में गौमूत्र का कमाल.
गौमूत्र अर्क सुबह शाम 20 – 20 मि.ली. खाली पेट लेना है. और इसके बाद 30 मिनिट तक कुछ भी खाना नहीं है.
इसके साथ में ये नीचे बताया हुआ काढ़ा भी पीना है.
काढ़े के लिए आवश्यक सामग्री.
1. गिलोय
2. गोखरु
3.ऐरंड मूल
4. वरुण छाल
5. पुनँनवा
5. ईन्दजौ
उपर बताई गयी चीजें आपको किसी अच्छे पंसारी से साफ़ सुथरी कंडीशन में लेनी हैं. बाद में इन औषधियों को समान मात्रा में लेकर थोडा कुटकर 20 ग्राम की मात्रा में ले आैर 2 ग्लास पानी मे उबाले जब 1 ग्लास पानी बचे तब इसको छानकर पी लें.
यै प्रयोग भी सुबह शाम करना है. गौमूत्र लेने के आधे घंटे बाद ये काढ़ा पियें और इसके भी आधे घंटे तक कुछ भी खाना पीना नहीं है.
इन प्रयोग से जिनको पथरी, किडनी सिकुडना, डायालिसिस, किडनी फेल्योर जैसे रोग हैं उनसे आप बच जायेगे.

★किडनी के रोगियों के लिए 3 रामबाण प्रयोग.★
★1. नीम और पीपल की छाल का काढ़ा.
आवश्यक सामग्री।
नीम की छाल – 10 ग्राम
पीपल की छाल – 10 ग्राम
3 गिलास पानी में 10 ग्राम नीम की छाल और 10 ग्राम पीपल की छाल लेकर आधा रहने तक उबाल कर काढ़ा बना लें। इस काढ़े को दिन में 3-4 भाग में बाँट कर सेवन करते रहें। इस प्रयोग से मात्र सात दिन क्रिएटिनिन का स्तर व्यवस्थित हो सकता है या प्रयाप्त लेवल तक आ सकता है।
★2. गेंहू के जवारो और गिलोय का रस
गेंहू के जवारे (गेंहू घास) का रस
गिलोय(अमृता) का रस।
गेंहू की घास को धरती की संजीवनी के समान कहा गया है, जिसे नियमित रूप से पीने से मरणासन्न अवस्था में पड़ा हुआ रोगी भी स्वस्थ हो जाता है। और इसमें अगर गिलोय(अमृता) का रस मिला दिया जाए तो ये मिश्रण अमृत बन जाता है। गिलोय अक्सर पार्क में या खेतो में लगी हुयी मिल जाती है।
गिलोय के लिए आप हमारी पुरानी पोस्ट यहाँ क्लिक कर के पढ़िए।
http://onlyayurved.com/plant/giloy/giloy-nectar-remedy/
गेंहू के जवारों का रस 50 ग्राम और गिलोय (अमृता की एक फ़ीट लम्बी व् एक अंगुली मोटी डंडी) का रस निकालकर – दोनों का मिश्रण दिन में एक बार रोज़ाना सुबह खाली पेट निरंतर लेते रहने से डायलिसिस द्वारा रक्त चढ़ाये जाने की अवस्था में आशातीत लाभ होता है।
★3. गोखरू काँटा काढ़ा
250 ग्राम गोखरू कांटा (ये आपको पंसारी से मिल जायेगा) लेकर 4 लीटर पानी मे उबालिए जब पानी एक लीटर रह जाए तो पानी छानकर एक बोतल मे रख लीजिए और गोखरू कांटा फेंक दीजिए। इस काढे को सुबह शाम खाली पेट हल्का सा गुनगुना करके 100 ग्राम के करीब पीजिए। शाम को खाली पेट का मतलब है दोपहर के भोजन के 5, 6 घंटे के बाद। काढ़ा पीने के एक घंटे के बाद ही कुछ खाइए और अपनी पहले की दवाई ख़ान पान का रोटिन पूर्ववत ही रखिए।
15 दिन के अंदर यदि आपके अंदर अभूतपूर्व परिवर्तन हो जाए तो डॉक्टर की सलाह लेकर दवा बंद कर दीजिए। जैसे जैसे आपके अंदर सुधार होगा काढे की मात्रा कम कर सकते है या दो बार की बजाए एक बार भी कर सकते है।
ज़रूरत के अनुसार ये प्रयोग एक हफ्ते से 3 महीने तक किया जा सकता है. मगर इसके रिजल्ट १५ दिन में ही मिलने लग जाते हैं. अगर कोई रिजल्ट ना आये तो बिना डॉक्टर या वैद की सलाह से इसको आगे ना बढ़ाएं.

ये पोस्ट अायुर्वेद की साईट से ली गयी हे इनका उद्देश्य आम लोगो की भलाई ।इच्छा से ही ये पोस्ट्स यहाँ डाली गयी हे ताकि ज्यादा से ज्यादा लोगो का भला हो सके